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डॉ. अच्युत सामंत को रोमानिया के नगर की मानद नागरिकता, कई अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित भुवनेश्वर: प्रख्यात शिक्षाविद्, समाज सुधारक तथा कीट,कीस और कीम्स के संस्थापक डॉ. अच्युत सामंत को शिक्षा, सामाजिक विकास और मानवीय सेवा के क्षेत्र में उनके आजीवन योगदान के लिए 21 सितंबर 2026 को रोमानिया के मिलिशाउत्सी (Milișăuți) नगर की मानद नागरिकता प्रदान की गई। उन्हें बर्लाद (Bârlad) नगर पालिका द्वारा प्रतिष्ठित ‘की टू द सिटी ऑफ बर्लाद’ (Key to the City of Bârlad) से भी सम्मानित किया गया। इस प्रकार वे दो रोमानियाई नगर पालिकाओं से ऐसे नागरिक सम्मान प्राप्त करने वाले पहले ओड़िया व्यक्ति बन गए हैं। रोमानिया में मानद नागरिकता किसी नगर द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। वहीं, ‘की टू द सिटी’ एक प्राचीन यूरोपीय परंपरा है। पुराने समय में नगरों के प्रवेश द्वार होते थे और उनकी चाबी केवल उस व्यक्ति को सौंपी जाती थी, जिस पर नगरवासी पूर्ण विश्वास करते थे। डॉ. सामंत ने रोमानिया में भारत के राजदूत डॉ. मनोज कुमार मोहापात्रा के साथ बर्लाद का दौरा किया। डॉ. सामंत ने कहा, “रोमानिया के मिलिशाउत्सी में मुझे मिले आत्मीय स्वागत से मैं अत्यंत भावुक हुआ। दोनों शहरों के लोगों से मिले प्रेम और स्नेह की स्मृति हमेशा मेरे हृदय के करीब रहेगी।” उन्होंने रोमानिया के लोगों के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। ‘लीडर ऑफ द ईयर’ सम्मान डॉ. सामंत को CEEMAN Champions Awards 2026 में शिक्षा, सामाजिक विकास, मानवीय सेवा और संस्थान निर्माण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए ‘Leader of the Year’ के रूप में भी सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार रोमानिया में आयोजित 34वें CEEMAN Annual Conference में प्रदान किया गया। उनकी अनुपस्थिति में उनके प्रतिनिधि ने यह सम्मान ग्रहण किया। CEEMAN (International Association for Management Development in Dynamic Societies) का मुख्यालय स्लोवेनिया के ब्लेड में है और इसके लगभग 50 देशों से करीब 180 सदस्य हैं। FIDE का ‘Education Philanthropic Award’ 24 सितंबर 2026 को उज्बेकिस्तान में आयोजित Summit on Chess in Education के दौरान, 46वें FIDE Chess Olympiad and Congress के अवसर पर डॉ. अच्युत सामंत को FIDE का ‘Education Philanthropic Award’ प्रदान किया गया। उनकी ओर से उनके प्रतिनिधि ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। यह पुरस्कार FIDE के कार्यवाहक अध्यक्ष विश्वनाथन आनंद तथा FIDE Management Board की उपाध्यक्ष डाना रेज़निएसे ने प्रदान किया। इस अवसर पर लगभग 120 देशों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। भारत से डॉ. सामंत पुरस्कार प्राप्त करने वालों में शामिल रहे, जिनमें विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी शामिल हैं। उन्हें खेल और शिक्षा के क्षेत्र में आजीवन योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर FIDE, KIIT और KISS ने शिक्षा में शतरंज (Chess in Education) से जुड़ी पहलों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। कोसोवो में चार और सम्मान अन्य उपलब्धियों के तहत, प्रिस्टिना, रिपब्लिक ऑफ कोसोवो में आयोजित 45वें World Congress of Poets के दौरान डॉ. सामंत को चार महत्वपूर्ण सम्मानों से भी सम्मानित किया गया: ‘Mother Teresa Award’ AAB University College, Pristina की ओर से ‘Professor Honoris Causa’ City of Peja की ओर से सम्मान World Congress of Poets के अध्यक्ष का Medal इस प्रकार डॉ. अच्युत सामंत को शिक्षा, सामाजिक सेवा, मानवीय कार्य, खेल और संस्थान निर्माण के क्षेत्र में उनके दीर्घकालिक योगदान के लिए विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं।

लोकतन्त्र सेनानी सम्मान विधेयक – २०२५ पारित- इमरजेंसी के योद्धाओं में खुशी



गैरसैण विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष के भारी हंगामे व व्यवधान के बीच ’उत्तराखण्ड लोकतन्त्र सेनानी सम्मान विधेयक – २०२५’ को सदन में ध्वनिमत से पारित कराने के लिए इमरजेंसी के योद्धाओं ने सीएम पुष्कर सिंह धामी का आभार प्रकट किया है।
इमरजेंसी के दौरान कई माहों तक जेल में यातनाएं सहन करने वाले प्रेम बड़ाकोटी ने कहा है कि सीएम धामी तथा उनकी टीम, विधायक गणों के इस साहसिक तथा न्यायपूर्ण कदम के प्रति समस्त उत्तराखण्डवासी, लोकतन्त्र सेनानी, व उनके परिवारजन, हार्दिक धन्यवाद व्यक्त करते हैं।
बड़ाकोटी ने कहा कि 50 वर्षों के लम्बे अन्तराल के बाद सरकार ने इस विषय को अंगीकार किया, मान्यता दी है।
स्मरण रहे, आपातकाल के विरुद्ध संघर्षरत कारागार बन्दियों ने कभी भी कोई माँग सरकार से नही की। इस दीर्घ कालावधि तक आपातकाल में हुए अन्याय के विरुद्ध उस त्रासदीपूर्ण संघर्ष को इन कारागार निरुद्ध स्वयंसेवकों और जनसंघ के कार्यकर्ताओं ने निःस्वार्थ भाव से निज अन्तःकरण में संजोकर रखा ताकि समाज की आगामी पीढ़ी को जीवन्त सन्देश जाये कि आपातकाल की निरंकुशता कितनी भयावह थी और विरोध में जो संघर्ष हुआ, वह जनतन्त्र के रक्षार्थ एक जनज्वार था अस्तु।
उन्होंने कहा कि गैरसैण सत्र में पारित अधिनियम की संवैधानिक प्रक्रिया में उत्तराखण्ड शासन के जिन वरिष्ठ, कनिष्ठ अधिकारियों, शुभचिन्तकों ने अपने समय, श्रम का मनोयोग से जो योगदान किया है, हम सदैव उनके सद्व्यवहार के प्रशंसक हैं। साथ ही भाजपा संगठन के सभी पदाधिकारी, कार्यकर्ताओं का भी आभार, जिन्होंने इस विषय पर सम्मति तथा इसकी भावना को संरक्षण एवं महत्व दिया।
बड़ाकोटी ने कहा कि गत समय में अनेकों वरिष्ठ कार्यकर्ता, आपातकाल के प्रेरक योद्धा दिवंगत हो गये।
इस अवसर पर उनके कृतत्व का पुण्य स्मरण करना भी हमारा कर्तव्य है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्यों में सन्नद्ध, ‘लोकतन्त्र सेनानी’ की संज्ञा से सम्मानित ये सभी अनुभवी कार्यकर्ता, कार्यकर्त्री, पवित्र अन्तःकरण से आप सभी को पुनः साधुवाद ज्ञापित करते हैं। आप समाज कार्य में सिद्ध हों, सफल हों, बस यही मनोरथ है।
लोकतत्र सेनानी संघ के अन्य सदस्यों ने भी धामी सरकार का आभार प्रकट किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी ने भी धामी सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे इमरजेंसी के दौरान जेल गए सेनानियों को सम्मान मिला है।
सेनानी विजय स्नेही, पुनीत लाल ढींगरा, कृष्ण कुमार अग्रवाल, आदि ने भी धामी सरकार का आभार प्रकट किया है।
सीएम धामी ने कहा..
हमारी सरकार ने उन योद्धाओं का सम्मान किया है जिन्होंने लोकतन्त्र बचाया है। कांग्रेस की इंदिरा सरकार ने अपनी गद्दी बचाए रखने के लिए आरएसएस ,जनसंघ के नेताओं को जेल भेजकर उन्हें यातनाएं दी थी वो दौर देश के लोकतंत्र का काला अध्याय रहा है। ऐसे योद्धाओं को सम्मानित करके हम गौरवान्वित हुए है।


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