सेना और समाज में वीर सपूत इसरार आलम अंसारी की यादें हमेशा जीवित रहेंगी
वीर कुंवर सिंह किला मैदान में गार्ड ऑफ़ ऑनर, अंतिम सलामी दी गई
ईजी० केमिकल अली/जगदीशपुर/भोजपुर: नगर पंचायत स्थित मंगरी चौक वार्ड संख्या 8 के वीर सपूत इसरार आलम अंसारी का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। लंबे समय से बीमार चल रहे इसरार आलम अंसारी का इलाज कोलकाता के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। कई दिनों तक लगातार इलाज के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका और इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
इसरार आलम अंसारी उम्र 52 वर्ष थे। उनके पिता का नाम मो. मोहायुद्दीन अंसारी था। उन्होंने वर्ष 1992 में भारतीय वायु सेना में भर्ती होकर देश सेवा में योगदान दिया। वे इंडियन एयर फोर्स में जूनियर विंग कमांडर के पद पर कार्यरत थे और उधमपुर एयरबेस, जम्मू-कश्मीर में तैनात थे। उनका सेवा काल लंबा और समर्पित रहा। उनके निधन से सेना साथियों और पूरे क्षेत्र में गहरा शोक फैल गया। उनके सेवा अवधि में केवल चार साल बाकी थे। उनके सम्मान में राष्ट्रीय ध्वज के साथ अंतिम विदाई दी गई।
परिवार की बात करें तो इसरार अंसारी दो भाईयों में बड़े थे। उनके पुत्र आरिफ अंसारी 28 वर्ष की उम्र में ओमान में कार्यरत हैं, जबकि पुत्री नुसरत अंसारी 24 वर्ष की हैं। दोनों अभी अविवाहित हैं। उनका छोटा भाई सऊदी अरब में कार्यरत है। इस पारिवारिक पृष्ठभूमि ने इसरार अंसारी को अनुशासित और देशभक्ति के मार्ग पर अग्रसर किया।

उनके सम्मान में वीर कुंवर सिंह किला मैदान स्थित साकेत कला कुंज मंच पर गार्ड ऑफ़ ऑनर का सलामी दी गई। इस दौरान उन्हें श्रद्धांजलि स्वरूप में 33 राउंड फायर किया गया और उनकी बेटी को तिरंगा प्रदान किया गया। यह दृश्य उनके साहस, देशभक्ति और परिवार के प्रति समर्पण का प्रतीक बन गया।
स्थानीय लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद इसरार आलम अंसारी का सुपर्द-ए-खाक जगदीशपुर स्थित राजा के पोखरा कब्रिस्तान में किया गया। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, रिश्तेदार, मित्र और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।





